एक फोरेक्स मैकेनिकल ट्रेडिंग सिस्टम कैसे बनाएं

एक फोरेक्स मैकेनिकल ट्रेडिंग सिस्टम कैसे बनाएं

2022-05-19 • अपडेट किया गया

प्रत्येक ट्रेडर अलग होता है। फिर भी, उन्हें श्रेणियों में एक करना संभव है। विशेष रूप से, सिस्टम ट्रेडर्स और विवेकाधीन ट्रेडर्स के बीच अंतर करना संभव है। विवेकाधीन ट्रेडर्स निर्णय लेने की प्रक्रिया के संबंध में अपने निर्णय पर भरोसा करते हैं। वे प्रत्येक ट्रेड को अलग तरीके से देख सकते हैं। इसके विपरीत, सिस्टम ट्रेडर्स, बाजार में सिग्नल खरीदने और बेचने और ऑर्डर निष्पादन के लिए मैकेनिकल ट्रेडिंग सिस्टम पर भरोसा करते हैं। इस आर्टिकल में सिस्टम ट्रेडर्स के बारे में जानकारी दी जाएगी और ट्रेडिंग सिस्टम की कुछ खूबियाँ और कमियाँ बताई जाएंगी।

मैकेनिकल ट्रेडिंग सिस्टम क्या है?

एक मैकेनिकल ट्रेडिंग सिस्टम बनाने के लिए, एक ट्रेडर को अपनी ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी के नियमों को सॉफ्टवेयर मैकेनिक्स में प्रोग्राम करना होता है। इन नियमों में एंट्री एक्सक्यूशन, स्टॉप लॉस प्लेसमेंट, ट्रेलिंग स्टॉप या टेक प्रॉफिट टारगेट और जोखिम प्रबंधन विकल्प शामिल होने चाहिए। एक ट्रेडर द्वारा कोड लिखने और उसका परीक्षण करने के बाद, मैकेनिकल ट्रेडिंग सिस्टम वास्तविक समय में सभी आवश्यक ट्रेडिंग टास्क करेगा। दूसरे शब्दों में, यह स्ट्रैटजी को ऑटोमेटिक रूप से ट्रेड करेगा।

ट्रेडिंग पोजीशन खोलने और प्रबंधित करने से संबंधित कई नियमित कार्यों को हल करने के लिए ट्रेडर्स मैकेनिकल ट्रेडिंग सिस्टम का उपयोग करते हैं। इसके अलावा, ऑटोमेटेड सीस्टम प्रक्रियाओं को तेज़ी से चलाकर एक ट्रेडर की उत्पादकता बढ़ा सकती हैं। अंत में, यदि कोई ट्रेडर सिस्टम को फॉलो करता है, तो मैकेनिकल सिस्टम भावनाओं को ट्रेडिंग से बाहर कर देगी।

MetaTrader मैकेनिकल फॉरेक्स ट्रेडिंग सिस्टम बनाने के लिए उपयुक्त है। सॉफ्टवेयर के माध्यम से ट्रेडर्स प्रोग्रामिंग लैंगवेज का उपयोग करके अपनी ट्रेडिंग स्ट्रैटिजीस को स्वचालित कर सकते है। हालांकि, इसका मतलब ये बिल्कुल भी नहीं है कि इस सुविधा का उपयोग करने के लिए आपको एक IT विशेषज्ञ होना चाहिए। आप एक सेटअप में कंडीशनल स्टेटमेंट्स को जोड़ सकते हैं और इस प्रकार अपनी ट्रेडिंग विधि को कोडीफाई कर सकते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस विधि में नियमों का एक स्पष्ट सेट होना चाहिए जिसे आप गणितीय रूप से अप्लाई कर सकते हैं।

क्या कोई आदर्श ट्रेडिंग सिस्टम है? ट्रेडर्स के लिए एक होली ग्रैल? ध्यान दें कि मैकेनिकल सिस्टम ऐतिहासिक डेटा पर आधारित होती हैं। परिणामस्वरूप, जरूरी नहीं कि भविष्य में वे स्वीकार करने योग्य प्रदर्शन करें क्योंकि मार्केट की स्थितियां बदल सकती हैं। आम तौर पर, सिस्टम को पिछली घटनाओं में फिट होने के लिए मजबूर न करें और इतिहास को समायोजित करने के लिए विशेष नियमों के साथ न आएं। साउन्ड जनरल प्रिन्सपल पर आधारित प्रणाली को स्वीकार करने योग्य प्रदर्शन देना चाहिए। विश्वसनीय और तर्कयुक्त परिणाम प्राप्त करने के लिए आप अपने सिस्टम डिवेलपमेंट और टेस्ट सॉफ़्टवेयर का उपयोग कर सकते हैं। आप रियल-टाइम में डेमो अकाउंट पर मैकेनिकल ट्रेडिंग सिस्टम भी चला सकते हैं और फिर इसके परफ़ॉर्मेंस का अनुमान लगा सकते हैं।

मैकेनिकल ट्रेडिंग सिस्टम के प्रकार

अपने टाइम होरिजोंन के आधार पर तीन प्रकार के मैकेनिकल ट्रेडिंग सिस्टम होते हैं। इसमें डे ट्रेडिंग टाइमफ्रेम, स्विंग ट्रेडिंग टाइमफ्रेम और लॉन्ग टर्म पोजीशन ट्रेडिंग टाइमफ्रेम शामिल हैं। आइए प्रत्येक प्रकार को विस्तार से देखें।

मैकेनिकल डे ट्रेडिंग सिस्टम

फ्यूचर मार्केट्स में डे ट्रेडिंग सिस्टम टॉप-रेटेड हैं, विशेष रूप से स्टॉक इंडेक्स जैसे S&P 500, NASDAQ 100 और Dow Jones 30। अपनी व्यापक दैनिक वॉल्यूम और इंट्राडे विचलनता की वजह से, ये बाजार मैकेनिकल ट्रेडिंग मैथड के लिए एक बहुत अच्छा स्थान हैं। एक ऑटोमेटेड इंट्राडे ट्रेडिंग सिस्टम ट्रेडिंग सेशन के अंत तक कुछ मिनटों से लेकर कई घंटों या उससे अधिक समय तक स्थिति बनाए रखने की प्रवृत्ति रखता है। प्रमुख फोरेक्स पेयर्स भी डे ट्रेडिंग के लिए उपयुक्त हैं।

इंट्राडे ट्रेडिंग उद्देश्यों के लिए मार्केट की व्यवहार्यता का चुनाव करते समय, मार्केट वॉल्यूम, एवरेज डेली रेंज और ट्रांजेक्शन कॉस्ट पर विचार करना बहुत महत्वपूर्ण है, जो बिड और आस्क प्राइस और कमीशन के बीच स्प्रेड के रूप में आते हैं। श्रेष्ठ डे ट्रेडिंग मार्केट्स उच्च स्तर के मार्केट पार्टीसिपेशन को ऑफर करेंगे और एक ट्रेडर के लिए इंट्राडे प्राइस स्विंग्स का लाभ उठाने के लिए पर्याप्त विचलनता होनी चाहिए। इसके अलावा, स्प्रेड बहुत टाइट होना चाहिए, विशेषत ज्यादातर मामलों में वन टिक स्प्रेड के साथ। इससे आप कम टाइम फ्रेम में ट्रेडिंग से जुड़े औसत फ्रिक्शन को दूर कर सकेंगे।

मैकेनिकल स्विंग ट्रेडिंग सिस्टम

विभिन्न ट्रेडर्स स्विंग ट्रेडिंग सिस्टम को अलग तरह से समझते हैं। परंपरागत रूप से समझा जाए तो स्विंग ट्रेडिंग विधि का मतलब है कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ्तों तक पोजीशन रखना। स्विंग ट्रेडिंग सिस्टम आम तौर पर अधिकांश डे ट्रेडिंग सिस्टम की तुलना में एवरेज विन से एवरेज ट्रांजेक्शन मूल्य का एक बेहतर अनुपात प्रदान करते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि जब हम बहुत ज्यादा समय के लिए पोजीशन को होल्ड कर सकते हैं, तो हमें ट्रांजेक्शन की लागत को अपेक्षाकृत कम रखते हुए ट्रेड से अधिक लाभ कमाने का अवसर मिलता है।

कुछ ट्रेडर्स पाते है कि कभी-कभी अलग से अडजस्टमेंट शुरू किए बिना ही डे ट्रेडिंग से स्विंग ट्रेडिंग पर स्विच करना एक हारने वाली प्रणाली की अपेक्षा लाभदायक हो सकता है। फोरेक्स मार्केट में ऑटोमेटेड स्विंग ट्रेडिंग सिस्टम काफी लोकप्रिय हैं।

अधिक लोकप्रिय स्विंग ट्रेडिंग पेयर्स में EURUSD, GBPUSD, USDJPY, EURJPY और GBPJPY शामिल हैं। ये इन्स्ट्रूमेंट्स लिक्विड और वोलाटाइल करेंसी पेयर्स हैं जो विभिन्न स्विंग ट्रेडिंग विधियों के लिए खुद को अच्छी तरह से कर्ज देते हैं। इसके अलावा, उन्हें अक्सर एक ऑटोमेटेड फोरेक्स ट्रेडिंग सिस्टम में ट्रांसलेटेड किया जा सकता है।

मैकेनिकल ट्रेंड को फॉलो करने वाले सिस्टम

ट्रेंड को फॉलो करने वाले सिस्टम हाई टाइमफ्रेम पर सर्वोत्तम कार्य करते हैं। विशेष रूप से, साप्ताहिक डेटा पर आधारित ट्रेंड-फालोइंग स्ट्रेटेजी अधिकांश अन्य टाइम-फ्रेम से बेहतर प्रदर्शन करती हैं। अपने स्वभाव से, एक ऑटोमेटेड ट्रेंड-फॉलोइंग सिस्टम एक उभरते हुए ट्रेंड को पहचानने, उससे जुड़ते है और जितना हो सके उतने लंबे समय तक इसके साथ रहने का प्रयास करती है। इस प्रकार, बहुत से ट्रेंड-फॉलोइंग सिस्टम आमतौर पर हफ्तों से महीनों तक अपने पोजीशन को होल्ड करती हैं।

इस ट्रेंड-फॉलोइंग दृष्टिकोण पर आधारित मैकेनिकल ट्रेडिंग सिस्टम को 1970 और 1980 के दशक में लैरी विलियम्स, बिल एकहार्ट और रिचर्ड डेनिस जैसे दिग्गज ट्रेडर्स द्वारा लोकप्रिय बनाया गया था। मैकेनिकल ट्रेडिंग सिस्टम कई अलग-अलग क्षेत्रों जैसे ऊर्जा, मेटालर्जी, फाइनेंस और कृषि उत्पादों में अच्छी तरह से काम कर सकती हैं। उनका उपयोग ज्यादातर में फोरेक्स में भी किया जाता हैं। जब तक कैटालिस्ट आपूर्ति और मांग के बीच असंतुलन पैदा करते हैं, जो लॉंग-टर्म ट्रेंड को फॉलो करते हैं, उनके पास प्राइस मूवमेंट का लाभ उठाने के अवसर होंगे।

मैकेनिकल ट्रेडिंग सिस्टम कैसे बनाएं

आपका अपनी इच्छानुसार अपने सिस्टम को उतना सिम्पल या एडवांस बना सकते है। महत्वपूर्ण बात यह है कि आप इसे अपनी स्थिति और जरूरतों के अनुसार ढाल सकते हैं। डिवेलपमेंट प्रक्रिया में निम्नलिखित सामान्य स्टेप्स होने चाहिए:

स्टेप 1: एक टाइम फ्रेम का चुनाव करना

स्टेप 2: लॉगिन नियमों को डिफ़ाईन करना

स्टेप 3: एग्जिट संबंधित नियमों को डिफ़ाईन करना

स्टेप 4: बैकटेस्टिंग

स्टेप 1: एक टाइम फ्रेम का चुनाव करना

सबसे पहले, अपने सिस्टम के लिए एक प्राइस टाइम फ्रेम का चुनाव करें : M1, M5, M15, M30, H1, H4, या D1। अपने सिस्टम को उन सभी पर काम करने की कोशिश करने के बजाय इन टाइम फ्रेम में से केवल एक को चुनना अच्छा रहता है।

एक नियम की तरह, टाइम फ्रेम जितना कम होगा, प्रति ट्रेड औसत लाभ उतना ही कम होगा और ट्रेडों की संख्या उतनी ही अधिक होगी। आप तय करें कि आपके लिए कौन सा टाइम फ्रेम सबसे अच्छा है। उदाहरण के लिए, एक डे ट्रेडिंग प्रोफेशनल 5 मिनट के चार्ट पर ट्रेड कर सकता है, लेकिन कोई व्यक्ति जो दिन में केवल एक बार ट्रेडिंग स्क्रीन तक पहुंच सकता है, वह दैनिक चैट को प्राथमिकता दे सकता है।

तो, आइए “रेड ड्रैगन” नामक एक ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी पर विचार करें। इसके लिए H1 टाइम फ्रेम की आवश्यकता होती है।

स्टेप 2: लॉगिन नियमों को डिफ़ाईन करना

लाखों अलग-अलग एंट्री के नियम हैं, लेकिन वे सभी दो बड़े समूहों में विभाजित किये गए हैं: ट्रेंड-फॉलोइंग नियम और रिवर्सल नियम।

ट्रेंड-फॉलोइंग सिस्टम मार्केट में स्थापित ट्रेंड को कैपिटलाइज़ करने का प्रयास करता हैं। इन प्रणालियों में आमतौर पर ट्रेंड इंडिकेटर्स जैसे मूविंग एवरेज (MA) और एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) शामिल होते हैं। दूसरी ओर, रिवर्सल सिस्टम, मार्केट की दिशा में बदलाव का पता लगाने की कोशिश करते हैं और इसका फायदा उठाते हैं। RSI और Oscillators जैसे ऑसिलेटर अक्सर यहां उपयोग किए जाते हैं। ट्रेंड फॉलोइंग सिस्टम की तुलना में, रिवर्सल सिस्टम में कम ट्रेड ड्यूरेशन और अधिक ट्रेड होते हैं। नतीजतन, रिवर्सल सिस्टम उन ट्रेडर्स के लिए उपयुक्त हैं जो अधिक सक्रिय हैं।

“रेड ड्रैगन” एक ट्रेंड स्ट्रेटेजी है। यह मुख्य रूप से EMA (एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज) और Parabolic SAR पर निर्भर करता है। Awesome Oscillator एक अतिरिक्त संकेतक के रूप में प्रयोग किया जाता है।

इन्डिकेटर्स की सूची:

  • ЕМА (14, हाई)
  • ЕМА (14, लो)
  • Parabolic SAR (0.01, 0.2)
  • Awesome (डिफ़ॉल्ट सेटिंग्स)

BUY ट्रेड खोलने के नियमों में शामिल हैं:

  • कैंडलस्टिक ने चैनल की ऊपरी सीमा को तोड़ दिया और ऊपर बंद हो गया।
  • Parabolic SAR के डॉट्स कीमत से नीचे होते हैं।
  • Awesome Oscillator का हिस्टोग्राम शून्य रेखा को ऊपर की ओर पार कर गया।

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स्टेप 3: एग्जिट संबंधित नियमों को डिफ़ाईन करना

अब जब आप एक ट्रेड में हैं, तो आपको एग्जिट संबंधित नियमों को परिभाषित करने की आवश्यकता है। आपको दो सामान्य नियमों की आवश्यकता है: एक स्टॉप लॉस नियम अपनी पूंजी को बचाने के लिए और एक लाभ के लिए टेक प्रॉफ़िट नियम।

स्टॉप लॉस के लिए जगह चुनने के लिए, आपको यह तय करना होगा कि आप एक ट्रेड में कितनी डिपॉजिट की अधिकतम राशि जोखिम मे डालना चाहते हैं। बहुत से विकल्प हैं:

  • धन की निश्चित राशि, उदाहरण: $20।
  • पूंजी का प्रतिशत, उदाहरण: फंड का 5%।
  • वर्तमान मूल्य का प्रतिशत, उदाहरण: एंट्री प्राइस का 1%।
  • अस्थिरता का प्रतिशत, उदाहरण: एवरेज डेली मूवमेंट का 100%।
  • समय, उदाहरण: 3 दिनों में छोड़ रहा है।
  • चार्ट स्टॉप लॉस, उदाहरण: MA के नीचे।

विस्तार में जाएं तो, आप इन विधियों को जोड़ सकते हैं। आप स्टॉप लॉस ऑर्डर को पूंजी के 1% पर, टेक प्रॉफिट ऑर्डर को एंट्री प्राइस के 3% पर सेट कर सकते हैं, और अगर कोई भी ऑर्डर ट्रिगर नहीं होता है तो दो दिनों में ट्रेड को बंद करने का समय नियम सेट कर सकते हैं।

हमारी रणनीति में, स्टॉप लॉस पिछले लोकल लो से नीचे सेट किया गया है। टेक प्रॉफिट को एक ट्रेंड में रखा जाता है और ये स्टॉप लॉस से तीन गुना बड़ा हो सकता है। आप इस एग्जिट की रणनीति को पूंजी नियम के प्रतिशत के साथ जोड़ सकते हैं। इस मामले में, आपको यह निर्धारित करने की आवश्यकता है कि आपके अकाउंट का आकार किस आकार के स्टॉप लॉस की अनुमति देता है।   

स्टेप 4: बैकटेस्टिंग

अब जबकि एक मैकेनिकल ट्रेडिंग सिस्टम के नियम अच्छी तरह से परिभाषित किये जा चुके हैं, यह चेक करना आवश्यक है कि क्या यह अच्छा है। यदि आप ऐतिहासिक डेटा पर इसका परीक्षण करते हैं तो आप सिस्टम की गुणवत्ता के बारे में कुछ निष्कर्ष निकालने में सक्षम होंगे।

जब आप अपनी रणनीति का बैकटेस्ट करते हैं, तो सुनिश्चित करें कि आप पर्याप्त समय में और विभिन्न बाजार स्थितियों जैसे ट्रेंड्स या श्रेणियों के तहत इसके प्रदर्शन का निरीक्षण करते हैं।

दो प्रकार के बैकटेस्टिंग होती हैं: मैनुअल और ऑटोमेटेड। एक्सपर्ट एडवाइजर (EA) जैसे कार्यक्रम जो कुछ तकनीकी शर्तों को पूरा करने पर आपके लिए ट्रेडों को खोलते और प्रबंधित करते हैं, ऑटोमेटेड बैकटेस्टिंग करते हैं। एक्सपर्ट एडवाइजर बनाने के लिए, आपको MQL4 प्रोग्रामिंग भाषा और सिन्टेक्स का ज्ञान होना चाहिए। नतीजतन, सरल और अधिक विश्वसनीय मैनुअल परीक्षण कई मामलों में सबसे अच्छा समाधान हो सकता है।

ट्रेडिंग रणनीति की मैन्युअल बैकटेस्टिंग

1) उस करेंसी पेयर का चार्ट खोलें जिस पर आप अपनी रणनीति का परीक्षण करना चाहते हैं। एक समय में एक पेयर का विश्लेषण करना बेहतर है। यदि आवश्यक हो, तो आप बाद में किसी अन्य पेयर पर बैकटेस्ट कर सकते हैं। चार्ट पर आवश्यक संकेतक और उपकरण अप्लाइ करें। चार्ट को पिछली अवधि तक स्क्रॉल करें।

2) आपके द्वारा परीक्षण की जा रही रणनीति से मेल खाने वाले सेटअप के लिए चार्ट देखें।

3) अपनी ट्रेडिंग रणनीति के आधार पर एक ट्रेड सेटअप प्राप्त करने के बाद, संभावित पिछले ट्रेड का विवरण लिखें। आपको तिथि, प्रवेश बिंदु, स्टॉप लॉस, टेक प्रॉफिट और कोई भी अन्य जानकारी जो आवश्यक हो, एंटर करनी होगी।

4) इस प्रक्रिया को तब तक दोहराएं जब तक आपको एक और संभावित ट्रेड सेटअप न मिल जाए और फिर तीसरे चरण पर वापस आ जाएं।

एक बार जब आपके पास संभावित ट्रेडों के परिणाम रिकॉर्ड हो जाते हैं (हम आपको एक्सेल का उपयोग करने की सलाह देंगे), तो ट्रेडिंग रणनीति की जीत दर की गणना करना आसान होगा।

यदि आप पाते हैं कि बैकटेस्ट किए जाने पर आपकी रणनीति खराब प्रदर्शन कर रही है, तो अपने अवलोकनों के आधार पर एक समय में एक वैरिएबल बदलने पर विचार करें जब तक कि आपके पास एक लाभदायक रणनीति न हो।

ऐतिहासिक डेटा पर ट्रेडिंग रणनीति के मैन्युअल परीक्षण में समय और अनुशासन की आवश्यकता होती है हालांकि, अगर इसे सही तरीके से किया जाता है, तो यह आपको रणनीति की सफलता की दर का एक अच्छा आईडिया देगा। याद रखें कि आप यह सुनिश्चित करने के लिए सिस्टम का परीक्षण करते हैं कि आपकी ट्रेडिंग अच्छी होगी। इसके अलावा, ऐतिहासिक डेटा के विपरीत मैन्युअल परीक्षण से आप मार्केट को बेहतर ढंग से समझ पाएंगे और आप एंटर और एग्जिट लेवल्स की पहचान करने के लिए प्रैक्टिस कर सकेंगे। अंत में, मैन्युअल बैकटेस्टिंग के बाद सबसे अच्छा अभ्यास डेमो अकाउंट पर एक रणनीति का परीक्षण करना है। आप देखेंगे कि वास्तविक मार्केट के माहौल में ट्रेडिंग सिस्टम कैसा प्रदर्शन करता है।

मैकेनिकल सिस्टम के लाभ

मैकेनिकल सिस्टम का मुख्य लाभ यह है कि वे स्वतः ही सिग्नल्स देकर भावनाओं को खत्म कर देते हैं। ज्यादातर ट्रेडर्स के रास्ते में भावनाएं आती हैं। मैकेनिकल सिस्टम अधिकांश भावनाओं को दूर ले जाता है।

इसके अतिरिक्त, अनुशासन की कमी के कारण कई ट्रेडर्स को बाजारों में पैसा गंवाना पड़ता है। एक मैकेनिकल सिस्टम के जरिए अनुशासन को आसानी से अप्लाइ किया जा सकता है क्योंकि आपको केवल सिस्टम को फॉलो करने का कमिटमेंट करना होता है। एक अच्छी तरह से परिभाषित किया गया मैकेनिकल सिस्टम आमतौर पर उस सिस्टम की तुलना में अधिक स्थिरता प्रदान करती है जिसमें एक ट्रेडर बेतरतीब ढंग से खरीद और बिक्री करने का फैसला करता है।

इसके अलावा, सिस्टम के साथ अधिक विश्वास के साथ ट्रेडिंग की जा सकती हैं। यदि आपने अपने सिस्टम का पूरी तरह से बैकटेस्ट कर लिया है, तो आप सुनिश्चित हो सकते हैं कि आपकी ट्रेडिंग लंबे समय में लाभदायक और टिकाऊ होगी। ओपन पोजीशन के बारे में चिंता करने वाली कम नींद न आने वाले रात।

अंत में, मैकेनिकल सिस्टम को आमतौर पर ट्रेंड के साथ ट्रेड करने के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो कि कम जोखिम वाली ट्रेडिंग विधि है। वे हमेशा एक मजबूत ट्रेंड की स्थिति में मुनाफे को चलने देंगे और मुनाफा जल्दी लेने के प्रलोभन का विरोध करेंगे।

मैकेनिकल सिस्टम के नुकसान

मैकेनिकल ट्रेडिंग सिस्टम का पहला नुकसान यह है कि यह यूनिक मार्केट स्थितियों के अनुकूल नहीं हो सकता है। ट्रेड सिग्नल्स के ऑटोमेटिक नेचर के कारण ऐसी प्रणालियां आपको मार्केट्स में अधिक अनुशासित और भावना मुक्त रहने में मदद करेगी। यह एक स्पष्ट लाभ है, जैसा कि पहले बताया गया है। हालांकि, यूनिक मार्केट की स्थितियों के बारे में सोचने और उनके अनुकूल होने के लिए एक ट्रेडिंग सिस्टम की असमर्थता भी एक नुकसान हो सकती है। अधिकतर, मार्केट में ट्रेडिंग संबंधित गतिविधि सामान्य होती है। फिर भी, कुछ उदाहरण हैं, विशेष रूप से ब्लैक स्वान की तरह होने वाली घटनाओं के दौरान, मानव तर्क और आलोचनात्मक सोच ही अधिक उपयुक्त होती है।

दूसरा नुकसान यह है कि एक मैकेनिकल ट्रेडिंग सिस्टम को ओवर-आप्टिमाइज्ड किया जा सकता है। टेस्ट रिजल्ट का रिव्यू करते समय ट्रेडर्स को बहुत सावधान रहने की जरूरत है। हाइपोथेन्टिकल रिजल्ट्स कभी-कभी कागज पर बहुत अच्छे लग सकते हैं। हालांकि, भविष्य में वास्तविक मार्केट की स्थितियों में एक जैसा सिस्टम अक्सर खराब प्रदर्शन करेगा । इससे कई सिस्टम ट्रेडर सर्वोत्तम पैरामीटर खोजने या सर्वोत्तम ट्रेडिंग सिस्टम बनाने के लिए अपने सिस्टम को ओवर-ऑप्टिमाइज़ करने के जाल में फंस जाते हैं। यह अक्सर एक कर्व फिटिंग सिस्टम के आकस्मिक निर्माण की ओर जाता है जो केवल ऐतिहासिक डेटा पर एक रणनीति की प्रभावशीलता को प्रदर्शित करता है और वास्तविक जीवन में व्यावहारिक रूप से व्यर्थ हो सकता है।

अंत में, एक ट्रेडर को मैकेनिकल ट्रेडिंग सिस्टम की बारीकी से निगरानी करने की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सब कुछ सुचारू रूप से चलता है। दूसरे शब्दों में, चूंकि कई मूविंग पार्ट्स हैं जिन्हें बिना फेल हुए काम करना है, अगर इन घटकों में से एक के विफल होने का जोखिम है, तो इससे पूरा सिस्टम क्रैश हो सकता है।

सारांश

कई ट्रेडर्स के फ़ाल का कारण बनने वाली भावनाओं को खत्म करने के लिए मैकेनिकल सिस्टम बहुत अच्छा हैं।

वे विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयुक्त हैं जिनके पास सभी जानकारियों को पढ़ने और/या व्याकुल होने का समय नहीं है। हालांकि, वे उन लोगों के लिए व्यर्थ हो सकते हैं जो ट्रेडिंग में भाग लेना पसंद करते हैं और स्वतंत्र रूप से ट्रेड से संबंधित आईडिया की तलाश करते हैं। 

फिर भी, सस्टनेबल सिस्टम ट्रेडिंग मुनाफे की वास्तविक कुंजी आपके विश्वसनीय सिस्टम को बनाने के लिए कंप्यूटर रिसर्च सीखने में समाहित है। एक कार्य प्रणाली खोजने के लिए बहुत अभ्यास और सीखने की आवश्यकता होती है, लेकिन अंत में होने वाला संभावित लाभ और संतुष्टि, काफी मोटिवेट करने वाला है।

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