मार्केट साइकल क्या हैं और ट्रेडर्स उनका उपयोग कैसे करते हैं?

मार्केट साइकल क्या हैं और ट्रेडर्स उनका उपयोग कैसे करते हैं?

2022-05-18 • अपडेट किया गया

वित्तीय बाजार गिरावट की अवधि और विकास के बीच बारी बारी से आता हैं। वे न केवल अर्थव्यवस्था से, बल्कि निवेशकों की मनोविज्ञान से भी संबंधित हैं। कई निवेशक अधिक लाभ कमाने के लिए मार्केट साइकल का विश्लेषण करने का प्रयास करते हैं। आइए एक नजर डालते हैं कि यह क्या है।

मार्केट साइकल क्या हैं?

मार्केट साइकल ऐसे पैटर्न या ट्रेंड हैं जो विभिन्न बाजारों में समय के साथ बनते हैं। वे दो न्यूनतम या अधिकतम प्राइस पॉइंट्स के बीच की अवधि को रिप्रेजेंट करते हैं। आमतौर पर, नए मार्केट साइकल तब सामने आते हैं जब किसी विशेष क्षेत्र या उद्योग में किसी प्रकार के नवीनता , नए उत्पाद या नियामक परिवर्तन के कारण ट्रेंड बनते हैं।

मार्केट साइकल की अवधि कुछ मिनटों से लेकर कई वर्षों तक हो सकती है, जो कि बाजार पर निर्भर करता है। साइकल के विभिन्न पहलू हैं: उदाहरण के लिए, डे-ट्रेडर्स हर 15-60 मिनट के अंतराल पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जबकि रियल एस्टेट के निवेशक 20 साल तक की अवधि का विश्लेषण करते हैं।

मार्केट साइकल को समझना

मार्केट में साइकल पहले से ही मौजूद होते हैं क्योंकि अर्थव्यवस्था में साइकल होते हैं।

हालाँकि, अन्य कारण भी हैं। इकोनॉमिक साइकल न केवल कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी को प्रभावित करता है, बल्कि निवेशकों की मनोवैज्ञानिक मानसिकता को भी प्रभावित करता है। वे बहुत कम ही विवेकशील और स्थिर पोजीशन रखते हैं। और जब मार्केट में तेजी आती है, तो निवेशक आशावादी होते हैं और जोखिम लेना चाहते हैं। वे स्टॉक खरीदते हैं, और कीमतें बढ़ जाती हैं। हालांकि, मूड बदल सकता है, फिर निवेशक बेचना शुरू कर देते हैं और सिक्योरिटीज की कीमत गिर जाती है।

मार्केट साइकल के चरण

प्रत्येक मार्केट साइकल में चार चरण होते हैं:

Phases of a Market Cycle accumulation mark-up distribution mark-down.jpg

संचय चरण

यह मार्केट साइकल का पहला चरण है। पिछले साइकल में बाजार के निचले स्तर पर जाने के बाद संचय शुरू होता है। जैसे-जैसे मांग बढ़ती है, कीमतें अब नए लो नहीं बना सकतीं। नतीजतन, डाउनट्रेंड अपना मोमेंटम खोना शुरू कर देता है। बाजार बुलिश हो जाता है।

मार्क-अप चरण

मार्क-अप चरण में, बाजार मजबूत होना शुरू हो जाता है। कीमतें बढ़ने लगती हैं और बाजार बड़ी संख्या में उनको खरीदारों को आकर्षित करता है जो शुरुआती चरण में नए अपट्रेंड में शामिल होना चाहते हैं। बुलिश प्राइस ट्रेंड्स ने कीमतों को नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है। पहली बार खरीदार अपने शुरुआती निवेश को पूंजी के रूप मे बदलने के लिए उच्च कीमतों का लाभ उठाते हैं। ट्रेडर्स भी इस समय अपट्रेंड का फायदा उठाते हैं।

डिस्ट्रब्यूशन चरण

डिस्ट्रब्यूशन चरण में, मार्केट मैं सेल ऑफ का होता हैं । हालांकि, कीमतें काफी लंबे समय तक स्थिर बनी रहती हैं। यह मार्केट में खरीदारों और विक्रेताओं के समान वितरण के कारण है। मार्कअप स्टेज में बुलिश के सेंटिमेंट्स फीके पड़ने लगते है, और कोई नई हाई नहीं दिखाई देती है। जो निवेशक बाजार में नहीं आए हैं, वे छूट जाते हैं। निवेशकों के लिए असेट्स बेचने का यह एक अच्छा समय है क्योंकि कीमतें चरम पर हैं।

मार्क-डाउन चरण

यह मार्केट साइकल का अंतिम चरण है। इस चरण में, बड़े निवेशक अपने निवेश को मुनाफे में लॉक करने के लिए बेचना शुरू करते हैं। बाकी के प्रतिभागी तुरंत फॉलो करते हैं। जब कीमतें डाउनट्रेंड में गिरती हैं, तो मार्केट के सेंटिमेंट्स अधिक बियरिश हो जाते है। जब कीमतें अपने चरम पर थीं, तो मार्केट में प्रवेश करने वाले निवेशक अपने निवेश को इस उम्मीद में रखेंगे कि कीमतें बढ़ेंगी। दुर्भाग्य से, कीमतों में गिरावट जारी रहती है। यह उन निवेशकों के लिए एक संकेत है जो नई खरीदारी करने के लिए डाउनट्रेंड के अंत का निर्धारण कर सकते हैं। जब ऐसा होता है, एकुमुलेशन चरण शुरू होता है और एक नया मार्केट साइकल बनता है।

मार्केट साइकल के प्रकार

विभिन्न प्रकार के मार्केट साइकल होते हैं। चलिए हम मुख्य बातों पर विचार करते हैं: यूनिवर्सल (वाइकॉफ मार्केट साइकल), वॉल स्ट्रीट मार्केट, फोरेक्स मार्केट और हाउज़िंग मार्केट साइकल।

वाइकॉफ मार्केट साइकल

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वाइकॉफ मार्केट साइकल के चार चरण हैं: एकुमुलेशन, मार्क-अप, डिस्ट्रब्यूशन, मार्क-डाउन

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वाइकॉफ मार्केट साइकल कीमत के आब्ज़र्वैशन, ट्रेंड के विकास के प्रमुख क्षणों और एकुमुलेशन और डिस्ट्रब्यूशन की अवधि पर आधारित है। हालांकि वाइकॉफ पद्धति मूल रूप से केवल शेयरों पर केंद्रित थी, अब यह सभी प्रकार के वित्तीय बाजारों पर लागू होती है।

वाइकॉफ मार्केट साइकल के चार मुख्य चरण हैं: एकुमुलेशन, मार्क-अप, डिस्ट्रब्यूशन, मार्क-डाउन

  1. एकुमुलेशन चरण ट्रेडिंग रेंज स्थापित करता है। तथाकथित मार्केट मेकर्स अधिकांश निवेशकों से पूर्व संपत्ति जमा करते हैं। इस चरण को आमतौर पर फ्लैट मूवमेंट से चिह्नित किया जाता है। महत्वपूर्ण मूल्य परिवर्तनों से बचने के लिए एकुमुलेशन क्रमिक तरीके से होता है।
  2. मार्क-अप चरण में, मार्केट ऊपर की ओर बढ़ने लगता है। एक ट्रेंड बन जाता है, जो धीरे-धीरे अधिक से अधिक नए निवेशकों को आकर्षित करता है, जो बाद में अधिक मांग की ओर ले जाता है। जैसे-जैसे बाजार ऊपर की ओर बढ़ता है, अन्य निवेशकों को बाजार में प्रवेश करने और असेट्स खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। नतीजतन, उत्साह अधिक लोगों को प्रभावित करता है जो भाग लेना चाहते हैं। ऐसी अवधि के दौरान, आपूर्ति की तुलना में मांग बहुत अधिक होती है।
  3. फिर खरीदे गए असेट्स का डिस्ट्रब्यूशन चरण आता है। विक्रेता अपनी लाभदायक पोजीशन को उन लोगों को बेचते हैं जो बाजार में लेट स्टेज पर प्रवेश करते हैं। नियम के तौर पर , डिस्ट्रीब्यूशन चरण को एक फ्लैट मूवमेंट द्वारा चिह्नित किया जाता है, जो समाप्त होने तक मांग को अवशोषित करता है।
  4. वाइकॉफ विधि के प्राइस मूवमेंट का अंतिम चरण है मार्क-डाउन। इस स्टेज पर, आपूर्ति अपना प्रभुत्व रखती है और कीमत लगभग नॉनस्टॉप नीचे जाती है। दूसरे शब्दों में, शेयरों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बिक जाने के बाद, बाजार नीचे की ओर बढ़ना शुरू कर देता है। आखिरकार, आपूर्ति मांग की तुलना में बहुत अधिक हो जाती है, और एक डाउनट्रेंड सेट हो जाता है।

फोरेक्स मार्केट साइकल

फोरेक्स साइकल कई प्रकार के होते हैं और उनके प्रकार और विशेषताएं किसी एक पैरामीटर या समय सीमा तक सीमित नहीं होती हैं। आइए सबसे कॉमन फोरेक्स टाइटनिंग और इजिंग साइकल में से एक को देखें जिसमें चार फेज हैं: एक्सपेन्शन , पीक, रेसेशन और ट्रॅाफ।

expansion, peak, recession, bottom.jpg

साइकल का पहला स्टेज है एक्सपेन्शन। इस चरण के दौरान, मार्केट पिछले बॉटम्स से उबरता है। असेट में मार्केट पार्टीसीपेंट की रुचि बढ़ जाती है। और वे एक्ट करना शुरू करते हैं: वे एक अपट्रेंड पर खरीदते हैं या डाउनट्रेंड पर बेचते हैं। जितने अधिक एक्टिव पार्टीसीपेंट्स एक्ट करते हैं, उतनी ही तेजी से ट्रेंड विकसित होता है।

अगला है पीक चरण। उत्पादन और बिक्री की मात्रा, रोजगार आदि जैसे आर्थिक संकेतक अपने उच्चतम स्तर पर हैं और अब नहीं बढ़ रहे हैं। इस स्टेज पर, ट्रेंड अपने आप समाप्त हो जाता है और इसकी तीव्र वृद्धि या गिरावट रुकने लगती है।

फिर आता है मंदी। शेयर पहले से ही गिर रहे हैं, और कमोडिटीज भी गिरती मांग की प्रत्याशा में घटने लगी हैं क्योंकि अर्थव्यवस्था कमजोर होती है। इस स्तर पर, निवेशक अपनी डील्स बंद कर देते हैं।

ट्रेंड साइकल का अंतिम चरण ट्रॅाफ है। इस चरण की विशेषताएं हैं रिलेटिव मार्केट काल्म और महत्वहीन मूल्य परिवर्तन हैं। इस अवधि के दौरान, मार्केट अपनी ताकत जमा कर रहा है और मंदी के बाद फिर से मजबूत हो रहा है। आर्थिक स्थिति अब खराब नहीं हो रही है, लेकिन अर्थव्यवस्था अभी विस्तार के चरण में नहीं है।

वॉल स्ट्रीट मार्केट साइकिल

वॉल स्ट्रीट मार्केट साइकिल वाइकॉफ साइकल के समान हैं। वे एकुमुलेशन चरण, मार्क-अप, डिस्ट्रीब्यूशन चरण और मार्क-डाउन पर भी आधारित हैं।

चार्ट पर वॉल स्ट्रीट मार्केट साइकल के चार इमोशनल चरण हैं: स्टेल्थ, अवेयरनेस, मेनिया, ब्लो-ऑफ

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पहला चरण वाइकॉफ साइकल में एकुमुलेशन चरण के समान है और इसे स्टेल्थ फेज कहा जाता है। इस चरण पर कीमतें धीरे-धीरे बढ़ती हैं और मनी मेकर्स खरीदारी के सर्वोत्तम अवसरों की पहचान करते हैं।

दूसरा चरण है जागरूकता। कीमतें फिर से बढ़ने लगी हैं, लेकिन निवेशक अपने गार्ड को कम नहीं होने दे रहे हैं। यदि वे फिर से बाजार में प्रवेश करने का फैसला करते हैं, तो वे सतर्क रहते हैं।

मार्केट साइकल के शीर्ष पर मेनिया है, अधिकतम वित्तीय जोखिम का केंद्र। इस समय अधिकतर निवेशक सोचते हैं कि कुछ भी बुरा नहीं हो सकता। ज्यादा से ज्यादा निवेशक अविश्वसनीय लाभ कमाने की उम्मीद में मार्केट में प्रवेश करते हैं, जिससे कीमतों में और वृद्धि होती है, और पूंजीकरण बुलंदियों पर पहुंच जाता है।

फिर बबल फूटता है और मार्केट ब्लो-ऑफ फेज में प्रवेश करता है। जैसे ही बुलिश ट्रेंड्स को बियरिश ट्रेंड द्वारा बदल दिया जाता है, निवेशक उम्मीदें खो देते हैं और घबराने लगते हैं। उन्हें अब अपने एक्शन पर भरोसा नहीं है और वे अपने नुकसान को कम करने की कोशिश कर रहे हैं। उनमें से कुछ अंत में हार मान लेते हैं और अब विश्वास नहीं करते कि बाजार ठीक हो जाएगा।

हाउज़िंग मार्केट साइकल

रियल स्टेट मार्केट विशेष रूप से साइक्लिक है क्योंकि आपूर्ति अक्सर तेजी से बदलती मांग को पूरा करने में विफल रहती है। साइकल में चार मुख्य चरण होते हैं: रिकवरी, एक्सपेन्शन, ज्यादा आपूर्ति और मंदी।

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रिकवरी ऐसी जगह है जहां मंदी के बाद मार्केट फिर से शुरू होता है। ट्रांजेक्शन की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती है और क्लेम न किए गए रियल स्टेट का हिस्सा घट जाता है: मांग एक्सपेन्शन चरण के दौरान बनाए गए अतिरिक्त स्थान को अवशोषित करना शुरू कर देती है।

एक्सपेन्शन आर्थिक विकास और जनसंख्या की क्रय शक्ति में वृद्धि से प्रेरित है। मार्केट साइकल इस चरण में तब प्रवेश करता है जब क्लेम न की गई रियल स्टेट का लेवल न्यूनतम हो जाता है और इसके विपरीत, खरीदार की रुचि बढ़ जाती है। इस स्तिति पर, निवेशक बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए नई सुविधाओं के निर्माण में सक्रिय रूप से निवेश करना शुरू करते हैं।

कुछ पॉइंट्स पर, निवेशक भूमि या परियोजनाओं की बढ़ी हुई लागत पर ध्यान देना बंद कर देते हैं, यह मानते हुए कि कीमतों और किराये की दरों में और वृद्धि से उनकी लागतों की भरपाई हो जाएगी। यही कारण है कि जब बाजार में संपत्तियों की कीमतें आबादी और व्यवसायों की वास्तविक क्रय शक्ति से अधिक होने लगती हैं, और ट्रांजेक्शन की संख्या घटने लगती है। उसी समय, विस्तार अवधि के दौरान शुरू हुई वस्तुओं का निर्माण रातोंरात नहीं रोका जा सकता है, और बाजार ओवरसैचुरेटेड हो जाता है, जिससे बबल का निर्माण हो सकता है।

मंदी कीमतों और किराये की दरों में गिरावट के रूप में प्रकट होती है, जो न केवल कम मांग से प्रभावित होती है, बल्कि बिना क्लेम किये गए रियल स्टेट के बढ़ते हिस्से से भी प्रभावित होती है। मंदी के दौरान, निवेशकनए प्रोजेक्ट्स को फ्रीज कर देते हैं और निर्माण दरों में गिरावट आती है।

निष्कर्ष

रिकरिंग मार्केट साइकल को समझना किसी भी ट्रेडर के लिए एक आवश्यक स्किल है। साइक्लिक अनालिसिस के जानकारों का मानना है कि साइकिल की मदद से ही पहले से पता लगाया जा सकता है कि बाजार किस दिशा में जाएगा। अब यह सच है या नहीं ये तो नहीं पता, लेकिन एक बात तय है: साइकल के विश्लेषण की सहायता से बाजार पूर्वानुमान की निपुणता में वृद्धि करना संभव है।

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